नामकरण मुहूर्त, सितंबर 2018
सितंबर 2018 में नामकरण के शुभ दिन और समय, New Delhi के लिए।
7 शुभ दिन — सितंबर 2018
-
गुरुवार, 6 सितंबर
- 7:36 am – 9:10 am पुनर्वसु नक्षत्र, कृष्ण एकादशी
- 10:44 am – 1:53 pm पुनर्वसु नक्षत्र, कृष्ण एकादशी
- 3:28 pm – 6:37 pm पुष्य नक्षत्र, कृष्ण द्वादशी
उस दिन राहु काल: 1:53 pm – 3:28 pm (हटाया गया)
-
सोमवार, 10 सितंबर
- 6:03 am – 7:37 am उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, शुक्ल प्रतिपदा
- 9:10 am – 10:44 am उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, शुक्ल प्रतिपदा
- 12:18 pm – 1:51 pm उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, शुक्ल प्रतिपदा
- 3:25 pm – 6:32 pm उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, शुक्ल प्रतिपदा
उस दिन राहु काल: 7:37 am – 9:10 am (हटाया गया)
-
बुधवार, 12 सितंबर
- 6:04 am – 7:37 am चित्रा नक्षत्र, शुक्ल तृतीया
- 9:10 am – 10:44 am चित्रा नक्षत्र, शुक्ल तृतीया
- 1:50 pm – 4:07 pm चित्रा नक्षत्र, शुक्ल तृतीया
उस दिन राहु काल: 12:17 pm – 1:50 pm (हटाया गया)
-
गुरुवार, 13 सितंबर
- 3:22 pm – 6:28 pm स्वाति नक्षत्र, शुक्ल पंचमी
उस दिन राहु काल: 1:49 pm – 3:22 pm (हटाया गया)
-
बुधवार, 19 सितंबर
- 1:46 pm – 6:21 pm उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, शुक्ल दशमी
उस दिन राहु काल: 12:14 pm – 1:46 pm (हटाया गया)
-
शुक्रवार, 21 सितंबर
- 6:08 am – 7:40 am श्रवण नक्षत्र, शुक्ल द्वादशी
- 9:11 am – 10:42 am श्रवण नक्षत्र, शुक्ल द्वादशी
- 12:14 pm – 3:16 pm श्रवण नक्षत्र, शुक्ल द्वादशी
- 4:48 pm – 6:19 pm धनिष्ठा नक्षत्र, शुक्ल द्वादशी
उस दिन राहु काल: 10:42 am – 12:14 pm (हटाया गया)
-
बुधवार, 26 सितंबर
- 6:11 am – 7:41 am रेवती नक्षत्र, कृष्ण प्रतिपदा
- 9:11 am – 10:42 am रेवती नक्षत्र, कृष्ण द्वितीया
- 1:42 pm – 6:13 pm रेवती नक्षत्र, कृष्ण द्वितीया
उस दिन राहु काल: 12:12 pm – 1:42 pm (हटाया गया)
अंतिम तिथि के लिए ज्योतिषी उस व्यक्ति की कुंडली भी देखते हैं जिसके लिए मुहूर्त है, जो कैलेंडर नहीं कर सकता। विवाह मुहूर्त के लिए दोनों कुंडलियाँ चाहिए — ज्योतिषी से पूछें.
यह कैसे काम करता है
- नामकरण के लिए हम परंपरा से शुभ वार वाले दिन लेते हैं, और उनमें वे घंटे जब तिथि और नक्षत्र दोनों शास्त्रों में सुझाए गए हों।
- रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, भद्रा (विष्टि करण) और अशुभ योग हटाए जाते हैं, साथ ही राहु काल, यमगंड और गुलिक काल भी।
- जहाँ परंपरा इस संस्कार के लिए चातुर्मास, खरमास और अधिक मास को टालती है, वहाँ वे दिन छोड़ दिए जाते हैं।
इस डिवाइस पर सहेजे गए:
सामान्य प्रश्न
यह मुहूर्त टूल क्या देखता है?
केवल पंचांग: वार, तिथि, नक्षत्र और योग; और यह भद्रा, राहु काल, यमगंड, गुलिक काल तथा जहाँ परंपरा टालती है वहाँ चातुर्मास, खरमास या अधिक मास को हटा देता है। यह किसी की कुंडली या गुरु–शुक्र अस्त नहीं देखता।
कुछ महीनों में गृह प्रवेश की तिथियाँ क्यों नहीं होतीं?
परंपरा चातुर्मास — देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक, मोटे तौर पर जुलाई से नवंबर — और खरमास, जब सूर्य धनु या मीन में हो, में गृह प्रवेश टालती है। तब टूल अगले ऐसे महीने पर खुलता है जिसमें शुभ दिन हो।
क्या विवाह के लिए कैलेंडर मुहूर्त पर्याप्त है?
नहीं। विवाह मुहूर्त दोनों की कुंडलियों से तय होता है, इसलिए यह टूल इसे नहीं देता। दोनों के जन्म विवरण के साथ ज्योतिषी से पूछें।
और पढ़ें
अपनी कुंडली के अनुसार मुहूर्त चाहिए?
जिन तिथियों पर विचार कर रहे हैं वे बताएँ, ज्योतिषी उन्हें आपकी कुंडली से मिलाकर देखेंगे।