एकादशी 2057: सभी तिथियाँ
New Delhi के लिए 2057 की हर एकादशी, तिथि के आरंभ और समाप्ति समय के साथ।
-
सफला एकादशी — सोमवार, 1 जनवरी 2057
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी
तिथि: 1 जन॰ 6:49 am – 2 जन॰ 4:02 am
पारण: अगली सुबह 7:14 am के बाद
वैष्णव (इस्कॉन) परंपरा में यह एकादशी मंगलवार, 2 जन॰ को.
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
पौष पुत्रदा एकादशी — मंगलवार, 16 जनवरी 2057
पौष शुक्ल एकादशी
तिथि: 15 जन॰ 3:00 pm – 16 जन॰ 5:40 pm
पारण: अगली सुबह 7:14 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
षटतिला एकादशी — बुधवार, 31 जनवरी 2057
पौष कृष्ण एकादशी
तिथि: 30 जन॰ 3:45 pm – 31 जन॰ 1:16 pm
पारण: अगली सुबह 7:09 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
जया एकादशी — गुरुवार, 15 फ़रवरी 2057
माघ शुक्ल एकादशी
तिथि: 14 फ़र॰ 12:24 pm – 15 फ़र॰ 2:35 pm
पारण: अगली सुबह 6:58 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
विजया एकादशी — गुरुवार, 1 मार्च 2057
माघ कृष्ण एकादशी
तिथि: 1 मार्च 12:03 am – 1 मार्च 10:13 pm
पारण: अगली सुबह 6:44 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
आमलकी एकादशी — शनिवार, 17 मार्च 2057
फाल्गुन शुक्ल एकादशी
तिथि: 16 मार्च 8:24 am – 17 मार्च 9:27 am
पारण: अगली सुबह 6:27 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
पापमोचनी एकादशी — शनिवार, 31 मार्च 2057
फाल्गुन कृष्ण एकादशी
तिथि: 30 मार्च 8:25 am – 31 मार्च 7:27 am
पारण: अगली सुबह 6:11 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
कामदा एकादशी — रविवार, 15 अप्रैल 2057
चैत्र शुक्ल एकादशी
तिथि: 15 अप्रैल 1:13 am – 16 अप्रैल 12:52 am
पारण: अगली सुबह 5:54 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
वरूथिनी एकादशी — रविवार, 29 अप्रैल 2057
चैत्र कृष्ण एकादशी
तिथि: 28 अप्रैल 5:36 pm – 29 अप्रैल 5:37 pm
पारण: अगली सुबह 5:41 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
मोहिनी एकादशी — मंगलवार, 15 मई 2057
वैशाख शुक्ल एकादशी
तिथि: 14 मई 2:17 pm – 15 मई 12:43 pm
पारण: अगली सुबह 5:29 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
अपरा एकादशी — सोमवार, 28 मई 2057
वैशाख कृष्ण एकादशी
तिथि: 28 मई 4:20 am – 29 मई 5:25 am
पारण: अगली सुबह 5:24 am के बाद
वैष्णव (इस्कॉन) परंपरा में यह एकादशी मंगलवार, 29 मई को.
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
निर्जला एकादशी — बुधवार, 13 जून 2057
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
तिथि: 13 जून 12:02 am – 13 जून 9:38 pm
पारण: अगली सुबह 5:23 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
योगिनी एकादशी — बुधवार, 27 जून 2057
ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी
तिथि: 26 जून 5:14 pm – 27 जून 7:15 pm
पारण: अगली सुबह 5:26 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
देवशयनी एकादशी — गुरुवार, 12 जुलाई 2057
आषाढ़ शुक्ल एकादशी
तिथि: 12 जुल॰ 7:25 am – 13 जुल॰ 4:37 am
पारण: अगली सुबह 5:32 am के बाद
वैष्णव (इस्कॉन) परंपरा में यह एकादशी शुक्रवार, 13 जुल॰ को.
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
कामिका एकादशी — शुक्रवार, 27 जुलाई 2057
आषाढ़ कृष्ण एकादशी
तिथि: 26 जुल॰ 8:31 am – 27 जुल॰ 11:04 am
पारण: अगली सुबह 5:40 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
श्रावण पुत्रदा एकादशी — शनिवार, 11 अगस्त 2057
श्रावण शुक्ल एकादशी
तिथि: 10 अग॰ 1:28 pm – 11 अग॰ 10:43 am
पारण: अगली सुबह 5:49 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
अजा एकादशी — शनिवार, 25 अगस्त 2057
श्रावण कृष्ण एकादशी
तिथि: 25 अग॰ 1:44 am – 26 अग॰ 4:11 am
पारण: अगली सुबह 5:56 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
परिवर्तिनी एकादशी — रविवार, 9 सितंबर 2057
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
तिथि: 8 सित॰ 7:17 pm – 9 सित॰ 4:55 pm
पारण: अगली सुबह 6:03 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
इंदिरा एकादशी — सोमवार, 24 सितंबर 2057
भाद्रपद कृष्ण एकादशी
तिथि: 23 सित॰ 7:55 pm – 24 सित॰ 9:34 pm
पारण: अगली सुबह 6:11 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
पापांकुशा एकादशी — सोमवार, 8 अक्टूबर 2057
आश्विन शुक्ल एकादशी
तिथि: 8 अक्टू॰ 1:58 am – 9 अक्टू॰ 12:19 am
पारण: अगली सुबह 6:18 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
रमा एकादशी — बुधवार, 24 अक्टूबर 2057
आश्विन कृष्ण एकादशी
तिथि: 23 अक्टू॰ 1:51 pm – 24 अक्टू॰ 2:16 pm
पारण: अगली सुबह 6:28 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
देवउठनी एकादशी — बुधवार, 7 नवंबर 2057
कार्तिक शुक्ल एकादशी
तिथि: 6 नव॰ 10:41 am – 7 नव॰ 10:03 am
पारण: अगली सुबह 6:38 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
उत्पन्ना एकादशी — गुरुवार, 22 नवंबर 2057
कार्तिक कृष्ण एकादशी
तिथि: 22 नव॰ 6:31 am – 23 नव॰ 5:41 am
पारण: अगली सुबह 6:50 am के बाद
वैष्णव (इस्कॉन) परंपरा में यह एकादशी शुक्रवार, 23 नव॰ को.
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
मोक्षदा एकादशी — गुरुवार, 6 दिसंबर 2057
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
तिथि: 5 दिस॰ 10:29 pm – 6 दिस॰ 11:08 pm
पारण: अगली सुबह 7:00 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
-
सफला एकादशी — शनिवार, 22 दिसंबर 2057
मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी
तिथि: 21 दिस॰ 9:20 pm – 22 दिस॰ 7:30 pm
पारण: अगली सुबह 7:10 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
यह कैसे काम करता है
- हर व्रत उसके शास्त्रीय नियम से रखा गया है: एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या सूर्योदय की तिथि से, प्रदोष सूर्यास्त के बाद की तिथि से, संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय की तिथि से और मासिक शिवरात्रि मध्यरात्रि की तिथि से।
- तिथि समय आपके चुने शहर के लिए सूर्य-चंद्र स्थिति (लाहिड़ी अयनांश) से हैं, इसलिए शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है।
- महीनों के नाम अमांत पंचांग के अनुसार हैं। स्थानीय और पारिवारिक परंपराएँ अलग हो सकती हैं; वहाँ अपने पुरोहित का पालन करें।
इस डिवाइस पर सहेजे गए:
सामान्य प्रश्न
एकादशी कितनी बार आती है?
महीने में दो बार — शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को। यानी वर्ष में लगभग 24 एकादशी, और अधिक मास वाले वर्ष में 26।
एकादशी की तिथि कभी-कभी दूसरे कैलेंडर से अलग क्यों होती है?
एकादशी उस दिन रखी जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि हो, और सूर्योदय शहर पर निर्भर है। अरुणोदय (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले) के समय दशमी हो तो वैष्णव पंचांग व्रत अगले दिन रखते हैं।
प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?
हर पक्ष की त्रयोदशी को, उस दिन जब यह तिथि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में हो — इसी समय शिव पूजा होती है।
संकष्टी चतुर्थी क्या है?
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मासिक गणेश व्रत। यह उस दिन रखा जाता है जिस दिन चंद्रोदय के समय यह तिथि हो, और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
और पढ़ें
व्रत या पूजा की योजना है?
ज्योतिषी बता सकते हैं कि आपकी कुंडली के लिए कौन सा व्रत उचित है और उसकी सही विधि क्या है।