प्रदोष व्रत 2086: सभी तिथियाँ

New Delhi के लिए 2086 की हर प्रदोष व्रत, तिथि के आरंभ और समाप्ति समय के साथ।

तिथि समय शहर के सूर्योदय से बदलते हैं।

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  1. रवि प्रदोष व्रत — रविवार, 13 जनवरी 2086

    पौष कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 12 जन॰ 11:12 pm – 13 जन॰ 9:42 pm

    प्रदोष काल: 5:44 pm – 8:08 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  2. शनि प्रदोष व्रत — शनिवार, 26 जनवरी 2086

    माघ शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 26 जन॰ 7:06 pm – 27 जन॰ 8:08 pm

    प्रदोष काल: 5:55 pm – 8:19 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  3. सोम प्रदोष व्रत — सोमवार, 11 फ़रवरी 2086

    माघ कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 11 फ़र॰ 1:28 pm – 12 फ़र॰ 10:46 am

    प्रदोष काल: 6:08 pm – 8:32 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  4. सोम प्रदोष व्रत — सोमवार, 25 फ़रवरी 2086

    फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 25 फ़र॰ 11:09 am – 26 फ़र॰ 1:11 pm

    प्रदोष काल: 6:18 pm – 8:42 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  5. बुध प्रदोष व्रत — बुधवार, 13 मार्च 2086

    फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 13 मार्च 12:42 am – 13 मार्च 9:16 pm

    प्रदोष काल: 6:28 pm – 8:52 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  6. बुध प्रदोष व्रत — बुधवार, 27 मार्च 2086

    चैत्र (अधिक) शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 27 मार्च 4:28 am – 28 मार्च 6:56 am

    प्रदोष काल: 6:36 pm – 9:00 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  7. गुरु प्रदोष व्रत — गुरुवार, 11 अप्रैल 2086

    चैत्र (अधिक) कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 11 अप्रैल 9:15 am – 12 अप्रैल 5:41 am

    प्रदोष काल: 6:44 pm – 9:08 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  8. शुक्र प्रदोष व्रत — शुक्रवार, 26 अप्रैल 2086

    चैत्र शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 25 अप्रैल 9:59 pm – 27 अप्रैल 12:17 am

    प्रदोष काल: 6:53 pm – 9:17 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  9. शुक्र प्रदोष व्रत — शुक्रवार, 10 मई 2086

    चैत्र कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 10 मई 4:06 pm – 11 मई 12:59 pm

    प्रदोष काल: 7:02 pm – 9:26 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  10. शनि प्रदोष व्रत — शनिवार, 25 मई 2086

    वैशाख शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 25 मई 2:48 pm – 26 मई 4:22 pm

    प्रदोष काल: 7:11 pm – 9:35 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  11. रवि प्रदोष व्रत — रविवार, 9 जून 2086

    वैशाख कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 8 जून 10:28 pm – 9 जून 8:15 pm

    प्रदोष काल: 7:18 pm – 9:42 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  12. सोम प्रदोष व्रत — सोमवार, 24 जून 2086

    ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 24 जून 6:12 am – 25 जून 6:37 am

    प्रदोष काल: 7:22 pm – 9:46 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  13. सोम प्रदोष व्रत — सोमवार, 8 जुलाई 2086

    ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 8 जुल॰ 5:32 am – 9 जुल॰ 4:29 am

    प्रदोष काल: 7:22 pm – 9:46 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  14. भौम प्रदोष व्रत — मंगलवार, 23 जुलाई 2086

    आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 23 जुल॰ 7:44 pm – 24 जुल॰ 6:46 pm

    प्रदोष काल: 7:17 pm – 9:41 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  15. भौम प्रदोष व्रत — मंगलवार, 6 अगस्त 2086

    आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 6 अग॰ 2:23 pm – 7 अग॰ 2:34 pm

    प्रदोष काल: 7:08 pm – 9:32 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  16. गुरु प्रदोष व्रत — गुरुवार, 22 अगस्त 2086

    श्रावण शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 22 अग॰ 7:21 am – 23 अग॰ 5:04 am

    प्रदोष काल: 6:53 pm – 9:17 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  17. गुरु प्रदोष व्रत — गुरुवार, 5 सितंबर 2086

    श्रावण कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 5 सित॰ 1:47 am – 6 सित॰ 3:08 am

    प्रदोष काल: 6:37 pm – 9:01 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  18. शुक्र प्रदोष व्रत — शुक्रवार, 20 सितंबर 2086

    भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 20 सित॰ 5:23 pm – 21 सित॰ 2:12 pm

    प्रदोष काल: 6:19 pm – 8:43 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  19. शुक्र प्रदोष व्रत — शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2086

    भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 4 अक्टू॰ 4:17 pm – 5 अक्टू॰ 6:30 pm

    प्रदोष काल: 6:03 pm – 8:27 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  20. रवि प्रदोष व्रत — रविवार, 20 अक्टूबर 2086

    आश्विन शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 20 अक्टू॰ 2:33 am – 20 अक्टू॰ 11:00 pm

    प्रदोष काल: 5:46 pm – 8:10 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  21. रवि प्रदोष व्रत — रविवार, 3 नवंबर 2086

    आश्विन कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 3 नव॰ 9:53 am – 4 नव॰ 12:28 pm

    प्रदोष काल: 5:34 pm – 7:58 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  22. सोम प्रदोष व्रत — सोमवार, 18 नवंबर 2086

    कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 18 नव॰ 11:36 am – 19 नव॰ 8:16 am

    प्रदोष काल: 5:26 pm – 7:50 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  23. भौम प्रदोष व्रत — मंगलवार, 3 दिसंबर 2086

    कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 3 दिस॰ 5:42 am – 4 दिस॰ 7:58 am

    प्रदोष काल: 5:23 pm – 7:47 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  24. बुध प्रदोष व्रत — बुधवार, 18 दिसंबर 2086

    मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 17 दिस॰ 9:06 pm – 18 दिस॰ 6:30 pm

    प्रदोष काल: 5:27 pm – 7:51 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

इस महीने के सभी व्रत देखें

यह कैसे काम करता है

  • हर व्रत उसके शास्त्रीय नियम से रखा गया है: एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या सूर्योदय की तिथि से, प्रदोष सूर्यास्त के बाद की तिथि से, संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय की तिथि से और मासिक शिवरात्रि मध्यरात्रि की तिथि से।
  • तिथि समय आपके चुने शहर के लिए सूर्य-चंद्र स्थिति (लाहिड़ी अयनांश) से हैं, इसलिए शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है।
  • महीनों के नाम अमांत पंचांग के अनुसार हैं। स्थानीय और पारिवारिक परंपराएँ अलग हो सकती हैं; वहाँ अपने पुरोहित का पालन करें।

सामान्य प्रश्न

एकादशी कितनी बार आती है?

महीने में दो बार — शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को। यानी वर्ष में लगभग 24 एकादशी, और अधिक मास वाले वर्ष में 26।

एकादशी की तिथि कभी-कभी दूसरे कैलेंडर से अलग क्यों होती है?

एकादशी उस दिन रखी जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि हो, और सूर्योदय शहर पर निर्भर है। अरुणोदय (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले) के समय दशमी हो तो वैष्णव पंचांग व्रत अगले दिन रखते हैं।

प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?

हर पक्ष की त्रयोदशी को, उस दिन जब यह तिथि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में हो — इसी समय शिव पूजा होती है।

संकष्टी चतुर्थी क्या है?

कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मासिक गणेश व्रत। यह उस दिन रखा जाता है जिस दिन चंद्रोदय के समय यह तिथि हो, और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।

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