संकष्टी चतुर्थी 1978: सभी तिथियाँ
New Delhi के लिए 1978 की हर संकष्टी चतुर्थी, तिथि के आरंभ और समाप्ति समय के साथ।
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संकष्टी चतुर्थी — शुक्रवार, 27 जनवरी 1978
पौष कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 27 जन॰ 5:51 pm – 28 जन॰ 6:36 pm
चंद्रोदय: 8:47 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — रविवार, 26 फ़रवरी 1978
माघ कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 26 फ़र॰ 7:34 am – 27 फ़र॰ 6:59 am
चंद्रोदय: 9:31 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — सोमवार, 27 मार्च 1978
फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 27 मार्च 6:09 pm – 28 मार्च 4:16 pm
चंद्रोदय: 9:23 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — बुधवार, 26 अप्रैल 1978
चैत्र कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 26 अप्रैल 2:05 am – 26 अप्रैल 11:16 pm
चंद्रोदय: 10:18 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — गुरुवार, 25 मई 1978
वैशाख कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 25 मई 8:30 am – 26 मई 5:13 am
चंद्रोदय: 10:04 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — शुक्रवार, 23 जून 1978
ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 23 जून 2:41 pm – 24 जून 11:30 am
चंद्रोदय: 9:39 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — शनिवार, 22 जुलाई 1978
आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 22 जुल॰ 9:54 pm – 23 जुल॰ 7:18 pm
चंद्रोदय: 9:03 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — सोमवार, 21 अगस्त 1978
श्रावण कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 21 अग॰ 7:12 am – 22 अग॰ 5:33 am
चंद्रोदय: 9:01 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — मंगलवार, 19 सितंबर 1978
भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 19 सित॰ 7:15 pm – 20 सित॰ 6:46 pm
चंद्रोदय: 8:14 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — गुरुवार, 19 अक्टूबर 1978
आश्विन कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 19 अक्टू॰ 10:18 am – 20 अक्टू॰ 11:05 am
चंद्रोदय: 8:16 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — शनिवार, 18 नवंबर 1978
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 18 नव॰ 4:10 am – 19 नव॰ 6:06 am
चंद्रोदय: 8:30 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी — सोमवार, 18 दिसंबर 1978
मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 18 दिस॰ 12:05 am – 19 दिस॰ 2:44 am
चंद्रोदय: 8:55 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
यह कैसे काम करता है
- हर व्रत उसके शास्त्रीय नियम से रखा गया है: एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या सूर्योदय की तिथि से, प्रदोष सूर्यास्त के बाद की तिथि से, संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय की तिथि से और मासिक शिवरात्रि मध्यरात्रि की तिथि से।
- तिथि समय आपके चुने शहर के लिए सूर्य-चंद्र स्थिति (लाहिड़ी अयनांश) से हैं, इसलिए शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है।
- महीनों के नाम अमांत पंचांग के अनुसार हैं। स्थानीय और पारिवारिक परंपराएँ अलग हो सकती हैं; वहाँ अपने पुरोहित का पालन करें।
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सामान्य प्रश्न
एकादशी कितनी बार आती है?
महीने में दो बार — शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को। यानी वर्ष में लगभग 24 एकादशी, और अधिक मास वाले वर्ष में 26।
एकादशी की तिथि कभी-कभी दूसरे कैलेंडर से अलग क्यों होती है?
एकादशी उस दिन रखी जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि हो, और सूर्योदय शहर पर निर्भर है। अरुणोदय (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले) के समय दशमी हो तो वैष्णव पंचांग व्रत अगले दिन रखते हैं।
प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?
हर पक्ष की त्रयोदशी को, उस दिन जब यह तिथि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में हो — इसी समय शिव पूजा होती है।
संकष्टी चतुर्थी क्या है?
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मासिक गणेश व्रत। यह उस दिन रखा जाता है जिस दिन चंद्रोदय के समय यह तिथि हो, और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
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व्रत या पूजा की योजना है?
ज्योतिषी बता सकते हैं कि आपकी कुंडली के लिए कौन सा व्रत उचित है और उसकी सही विधि क्या है।