व्रत कैलेंडर, जनवरी 2032

जनवरी 2032 में एकादशी, प्रदोष, संकष्टी चतुर्थी, मासिक शिवरात्रि, पूर्णिमा और अमावस्या, New Delhi के लिए।

तिथि समय शहर के सूर्योदय से बदलते हैं।

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  1. संकष्टी चतुर्थी — गुरुवार, 1 जनवरी 2032

    मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी

    तिथि: 1 जन॰ 6:19 am – 2 जन॰ 8:52 am

    चंद्रोदय: 8:54 pm

    गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।

  2. सफला एकादशी — शुक्रवार, 9 जनवरी 2032

    मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी

    तिथि: 8 जन॰ 3:27 pm – 9 जन॰ 1:57 pm

    पारण: अगली सुबह 7:15 am के बाद

    सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।

  3. शनि प्रदोष व्रत — शनिवार, 10 जनवरी 2032

    मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 10 जन॰ 11:41 am – 11 जन॰ 8:46 am

    प्रदोष काल: 5:41 pm – 8:05 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  4. मासिक शिवरात्रि — रविवार, 11 जनवरी 2032

    मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्दशी

    तिथि: 11 जन॰ 8:46 am – 12 जन॰ 5:20 am

    शिव की रात्रि पूजा; मुख्य पूजा मध्यरात्रि के आसपास।

  5. अमावस्या — सोमवार, 12 जनवरी 2032

    मार्गशीर्ष कृष्ण अमावस्या

    तिथि: 12 जन॰ 5:20 am – 13 जन॰ 1:36 am

    नया चंद्र। पितृ तर्पण और दान प्रचलित।

  6. पौष पुत्रदा एकादशी — शुक्रवार, 23 जनवरी 2032

    पौष शुक्ल एकादशी

    तिथि: 22 जन॰ 7:23 am – 23 जन॰ 9:03 am

    पारण: अगली सुबह 7:13 am के बाद

    सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।

  7. शनि प्रदोष व्रत — शनिवार, 24 जनवरी 2032

    पौष शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 24 जन॰ 11:07 am – 25 जन॰ 1:25 pm

    प्रदोष काल: 5:53 pm – 8:17 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  8. पूर्णिमा — मंगलवार, 27 जनवरी 2032

    पौष शुक्ल पूर्णिमा

    तिथि: 26 जन॰ 3:51 pm – 27 जन॰ 6:22 pm

    पूर्ण चंद्र। सत्यनारायण कथा और स्नान-दान प्रचलित।

  9. संकष्टी चतुर्थी — शनिवार, 31 जनवरी 2032

    पौष कृष्ण चतुर्थी

    तिथि: 31 जन॰ 1:38 am – 1 फ़र॰ 3:42 am

    चंद्रोदय: 9:25 pm

    गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।

पूरे वर्ष की सूची: एकादशी 2032, प्रदोष व्रत 2032, संकष्टी चतुर्थी 2032, मासिक शिवरात्रि 2032, पूर्णिमा 2032, अमावस्या 2032

यह कैसे काम करता है

  • हर व्रत उसके शास्त्रीय नियम से रखा गया है: एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या सूर्योदय की तिथि से, प्रदोष सूर्यास्त के बाद की तिथि से, संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय की तिथि से और मासिक शिवरात्रि मध्यरात्रि की तिथि से।
  • तिथि समय आपके चुने शहर के लिए सूर्य-चंद्र स्थिति (लाहिड़ी अयनांश) से हैं, इसलिए शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है।
  • महीनों के नाम अमांत पंचांग के अनुसार हैं। स्थानीय और पारिवारिक परंपराएँ अलग हो सकती हैं; वहाँ अपने पुरोहित का पालन करें।

सामान्य प्रश्न

एकादशी कितनी बार आती है?

महीने में दो बार — शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को। यानी वर्ष में लगभग 24 एकादशी, और अधिक मास वाले वर्ष में 26।

एकादशी की तिथि कभी-कभी दूसरे कैलेंडर से अलग क्यों होती है?

एकादशी उस दिन रखी जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि हो, और सूर्योदय शहर पर निर्भर है। अरुणोदय (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले) के समय दशमी हो तो वैष्णव पंचांग व्रत अगले दिन रखते हैं।

प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?

हर पक्ष की त्रयोदशी को, उस दिन जब यह तिथि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में हो — इसी समय शिव पूजा होती है।

संकष्टी चतुर्थी क्या है?

कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मासिक गणेश व्रत। यह उस दिन रखा जाता है जिस दिन चंद्रोदय के समय यह तिथि हो, और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।

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