व्रत कैलेंडर, मार्च 2038
मार्च 2038 में एकादशी, प्रदोष, संकष्टी चतुर्थी, मासिक शिवरात्रि, पूर्णिमा और अमावस्या, New Delhi के लिए।
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विजया एकादशी — सोमवार, 1 मार्च 2038
माघ कृष्ण एकादशी
तिथि: 28 फ़र॰ 10:54 pm – 1 मार्च 11:16 pm
पारण: अगली सुबह 6:45 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
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बुध प्रदोष व्रत — बुधवार, 3 मार्च 2038
माघ कृष्ण त्रयोदशी
तिथि: 3 मार्च 12:05 am – 4 मार्च 1:18 am
प्रदोष काल: 6:22 pm – 8:46 pm
सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।
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महाशिवरात्रि — गुरुवार, 4 मार्च 2038
माघ कृष्ण चतुर्दशी
तिथि: 4 मार्च 1:18 am – 5 मार्च 2:52 am
शिव की रात्रि पूजा; मुख्य पूजा मध्यरात्रि के आसपास।
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अमावस्या — शुक्रवार, 5 मार्च 2038
माघ कृष्ण अमावस्या
तिथि: 5 मार्च 2:52 am – 6 मार्च 4:44 am
नया चंद्र। पितृ तर्पण और दान प्रचलित।
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आमलकी एकादशी — बुधवार, 17 मार्च 2038
फाल्गुन शुक्ल एकादशी
तिथि: 16 मार्च 9:18 pm – 17 मार्च 7:52 pm
पारण: अगली सुबह 6:27 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
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गुरु प्रदोष व्रत — गुरुवार, 18 मार्च 2038
फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी
तिथि: 18 मार्च 5:39 pm – 19 मार्च 2:46 pm
प्रदोष काल: 6:31 pm – 8:55 pm
सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।
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पूर्णिमा — रविवार, 21 मार्च 2038
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा
तिथि: 20 मार्च 11:23 am – 21 मार्च 7:39 am
पूर्ण चंद्र। सत्यनारायण कथा और स्नान-दान प्रचलित।
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संकष्टी चतुर्थी — मंगलवार, 23 मार्च 2038
फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी
तिथि: 23 मार्च 8:22 pm – 24 मार्च 5:11 pm
चंद्रोदय: 9:14 pm
गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।
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पापमोचनी एकादशी — बुधवार, 31 मार्च 2038
फाल्गुन कृष्ण एकादशी
तिथि: 30 मार्च 12:08 pm – 31 मार्च 1:33 pm
पारण: अगली सुबह 6:11 am के बाद
सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
पूरे वर्ष की सूची: एकादशी 2038, प्रदोष व्रत 2038, संकष्टी चतुर्थी 2038, मासिक शिवरात्रि 2038, पूर्णिमा 2038, अमावस्या 2038
यह कैसे काम करता है
- हर व्रत उसके शास्त्रीय नियम से रखा गया है: एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या सूर्योदय की तिथि से, प्रदोष सूर्यास्त के बाद की तिथि से, संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय की तिथि से और मासिक शिवरात्रि मध्यरात्रि की तिथि से।
- तिथि समय आपके चुने शहर के लिए सूर्य-चंद्र स्थिति (लाहिड़ी अयनांश) से हैं, इसलिए शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है।
- महीनों के नाम अमांत पंचांग के अनुसार हैं। स्थानीय और पारिवारिक परंपराएँ अलग हो सकती हैं; वहाँ अपने पुरोहित का पालन करें।
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सामान्य प्रश्न
एकादशी कितनी बार आती है?
महीने में दो बार — शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को। यानी वर्ष में लगभग 24 एकादशी, और अधिक मास वाले वर्ष में 26।
एकादशी की तिथि कभी-कभी दूसरे कैलेंडर से अलग क्यों होती है?
एकादशी उस दिन रखी जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि हो, और सूर्योदय शहर पर निर्भर है। अरुणोदय (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले) के समय दशमी हो तो वैष्णव पंचांग व्रत अगले दिन रखते हैं।
प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?
हर पक्ष की त्रयोदशी को, उस दिन जब यह तिथि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में हो — इसी समय शिव पूजा होती है।
संकष्टी चतुर्थी क्या है?
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मासिक गणेश व्रत। यह उस दिन रखा जाता है जिस दिन चंद्रोदय के समय यह तिथि हो, और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
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व्रत या पूजा की योजना है?
ज्योतिषी बता सकते हैं कि आपकी कुंडली के लिए कौन सा व्रत उचित है और उसकी सही विधि क्या है।