व्रत कैलेंडर, जून 2053

जून 2053 में एकादशी, प्रदोष, संकष्टी चतुर्थी, मासिक शिवरात्रि, पूर्णिमा और अमावस्या, New Delhi के लिए।

तिथि समय शहर के सूर्योदय से बदलते हैं।

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  1. पूर्णिमा — रविवार, 1 जून 2053

    ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा

    तिथि: 31 मई 2:38 pm – 1 जून 4:31 pm

    पूर्ण चंद्र। सत्यनारायण कथा और स्नान-दान प्रचलित।

  2. संकष्टी चतुर्थी — गुरुवार, 5 जून 2053

    ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी

    तिथि: 4 जून 11:23 pm – 6 जून 1:48 am

    चंद्रोदय: 10:12 pm

    गणेश व्रत, चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है।

  3. योगिनी एकादशी — गुरुवार, 12 जून 2053

    ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी

    तिथि: 12 जून 7:04 am – 13 जून 5:19 am

    पारण: अगली सुबह 5:22 am के बाद

    वैष्णव (इस्कॉन) परंपरा में यह एकादशी शुक्रवार, 13 जून को.

    सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।

  4. शनि प्रदोष व्रत — शनिवार, 14 जून 2053

    ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी

    तिथि: 14 जून 2:50 am – 14 जून 11:44 pm

    प्रदोष काल: 7:20 pm – 9:44 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  5. मासिक शिवरात्रि — शनिवार, 14 जून 2053

    ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी

    तिथि: 14 जून 11:44 pm – 15 जून 8:10 pm

    शिव की रात्रि पूजा; मुख्य पूजा मध्यरात्रि के आसपास।

  6. अमावस्या — सोमवार, 16 जून 2053

    ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या

    तिथि: 15 जून 8:10 pm – 16 जून 4:21 pm

    नया चंद्र। पितृ तर्पण और दान प्रचलित।

  7. पद्मिनी एकादशी — गुरुवार, 26 जून 2053

    आषाढ़ (अधिक) शुक्ल एकादशी

    तिथि: 25 जून 9:36 pm – 26 जून 11:02 pm

    पारण: अगली सुबह 5:25 am के बाद

    सूर्योदय से व्रत; अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।

  8. शनि प्रदोष व्रत — शनिवार, 28 जून 2053

    आषाढ़ (अधिक) शुक्ल त्रयोदशी

    तिथि: 28 जून 12:50 am – 29 जून 2:54 am

    प्रदोष काल: 7:23 pm – 9:47 pm

    सूर्यास्त के बाद लगभग डेढ़ घंटे में शिव पूजा।

  9. पूर्णिमा — सोमवार, 30 जून 2053

    आषाढ़ (अधिक) शुक्ल पूर्णिमा

    तिथि: 30 जून 5:09 am – 1 जुल॰ 7:30 am

    पूर्ण चंद्र। सत्यनारायण कथा और स्नान-दान प्रचलित।

पूरे वर्ष की सूची: एकादशी 2053, प्रदोष व्रत 2053, संकष्टी चतुर्थी 2053, मासिक शिवरात्रि 2053, पूर्णिमा 2053, अमावस्या 2053

यह कैसे काम करता है

  • हर व्रत उसके शास्त्रीय नियम से रखा गया है: एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या सूर्योदय की तिथि से, प्रदोष सूर्यास्त के बाद की तिथि से, संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय की तिथि से और मासिक शिवरात्रि मध्यरात्रि की तिथि से।
  • तिथि समय आपके चुने शहर के लिए सूर्य-चंद्र स्थिति (लाहिड़ी अयनांश) से हैं, इसलिए शहरों में एक दिन का अंतर हो सकता है।
  • महीनों के नाम अमांत पंचांग के अनुसार हैं। स्थानीय और पारिवारिक परंपराएँ अलग हो सकती हैं; वहाँ अपने पुरोहित का पालन करें।

सामान्य प्रश्न

एकादशी कितनी बार आती है?

महीने में दो बार — शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को। यानी वर्ष में लगभग 24 एकादशी, और अधिक मास वाले वर्ष में 26।

एकादशी की तिथि कभी-कभी दूसरे कैलेंडर से अलग क्यों होती है?

एकादशी उस दिन रखी जाती है जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि हो, और सूर्योदय शहर पर निर्भर है। अरुणोदय (सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले) के समय दशमी हो तो वैष्णव पंचांग व्रत अगले दिन रखते हैं।

प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?

हर पक्ष की त्रयोदशी को, उस दिन जब यह तिथि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल में हो — इसी समय शिव पूजा होती है।

संकष्टी चतुर्थी क्या है?

कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मासिक गणेश व्रत। यह उस दिन रखा जाता है जिस दिन चंद्रोदय के समय यह तिथि हो, और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।

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