मेरे लिए कौन सा रत्न?
लग्न से जीवन, पुण्य और भाग्य रत्न।
यह कैसे काम करता है
- जन्म समय और स्थान से लग्न, फिर 1ले, 5वें और 9वें भाव के स्वामी निकाले जाते हैं।
- हर रत्न के साथ आपकी कुंडली में उस ग्रह की स्थिति, पारंपरिक विधि और सावधानी दी जाती है।
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सामान्य प्रश्न
वैदिक ज्योतिष में रत्न कैसे चुना जाता है?
प्रायः लग्न से: जीवन रत्न पहले भाव के स्वामी का, पुण्य रत्न पाँचवें भाव के स्वामी का और भाग्य रत्न नौवें भाव के स्वामी का। ये तीनों भाव हर लग्न के लिए सहायक माने जाते हैं।
किस ग्रह का कौन सा रत्न है?
सूर्य — माणिक; चंद्र — मोती; मंगल — मूँगा; बुध — पन्ना; गुरु — पुखराज; शुक्र — हीरा; शनि — नीलम; राहु — गोमेद; केतु — लहसुनिया।
रत्न पहनने से पहले ज्योतिषी से पूछना ज़रूरी है?
उचित है, ख़ासकर नीलम जैसे प्रभावशाली रत्नों के लिए। ज्योतिषी ग्रह की स्थिति, बल और चल रही दशा भी देखते हैं, जो लग्न आधारित सुझाव नहीं कर सकता।